सप्त सिद्धांत: जीवन जीने की आदर्श संहिता
पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी ने मानव मात्र के कल्याण और नैतिक उत्थान के लिए सात सरल परंतु अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांत प्रतिपादित किए, जिन्हें सप्त सिद्धांत कहा जाता है:
- सतनाम पर विश्वास: केवल एक निराकार, सर्वव्यापी सत्य स्वरूप ईश्वर (सतनाम) की आराधना करें।
- मूर्ति पूजा व पाखंड का निषेध: बाह्य आडंबरों और अंधविश्वास को छोड़कर अपने हृदय को निर्मल बनाएं।
- जातिगत भेदभाव का अंत: "मनखे-मनखे एक समान" मानकर सभी मनुष्यों से भ्रातृत्व भाव रखें।
- मांसाहार व जीव हत्या का त्याग: सभी प्राणियों के प्रति दया का भाव रखें और पूर्ण शाकाहारी बनें।
- नशामुक्ति: शराब, तंबाकू और सभी प्रकार के नशों से दूर रहकर शरीर और बुद्धि को स्वस्थ रखें।
- परोपकार व सेवा: भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और असहायों की निस्वार्थ सहायता करें।
- श्रम की शुद्धि व सदाचार: ईमानदारी की मेहनत से आजीविका कमाएं और परस्त्री गमन व चोरी का त्याग करें।
यदि आज का समाज इन सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपना ले, तो सामाजिक विषमता, अपराध और मानसिक तनाव का स्वतः ही उन्मूलन हो जाएगा।