मंदिर खुला है दर्शन समय: प्रातः 06:00 से रात्रि 10:00 तक
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
॥ सत्य ही ईश्वर है ॥ पावन सतनाम भक्ति विधान

परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी आरती एवं पावन पूजा विधि

दैनिक महा आरती, चौका आरती विधान, पावन श्वेत ध्वजारोहण नियम एवं पूजा ग्रन्थ का संपूर्ण संकलन।

दैनिक पावन आरती सुनें (Audio)
गिरौदपुरी धाम दैनिक आरती व सतनाम भजन
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॥ संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी की आरती॥

राग — कल्याण / प्रभाती
॥ जय सतनाम जय सतनाम ॥
आरती होथे सतनाम साहेब जिन सृष्टी से विस्तार है
१ पहिली आरती जगमग ज्योति, हीरा पदारत बारे मोती हो।
आरती होथे सतनाम
२. दुजे आरती कपुर धरे बाती, अब मै तो आरती उतारव बहु भाती हो।
आरती होथे सतनाम
३. तीजे आरती त्रिभुवन सोहे,रतन सिंहासन गुरु जी ल सोहे हो।
आरती होथे सतनाम
४. चौथे आरती चारो जग पुजा, सतनाम छोड़ दुसर नही दुजा हो।
आरती होथे सतनाम
५. पाच आरती जो नर गावे,चड़ विमान हंसा अमरलोक सिघावे हो।
आरती होथे सतनाम
६. छ: आरती छ: दर्शन पाये ,लख चौरासी के बंधना छोड़ाये हो।
आरती होथे सतनाम
७. साते आरती सतनामी घर आये,हंसा ला ऊबार अमरलोक पहुंचाये हो।
आरती होथे सतनाम,

॥ बोलो सतनाम साहेब की जय ॥

सतनाम पूजा का मूल सिद्धांत

पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी ने बाह्य आडंबरों, मूर्तिपूजा, पशु-बलि, छुआछूत और नशाखोरी का पूर्णतः खंडन कर निराकार सत्य, आत्मिक शुद्धि, अहिंसा और समता पर आधारित सरल एवं सात्विक पूजा पद्धति की स्थापना की।

आत्मिक व शारीरिक शुद्धि (Purity & White Attire)

प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करें। श्वेत रंग सत्य, शांति और पवित्रता का प्रतीक है। मन में किसी भी प्रकार का द्वेष, अहंकार या कटुता न रखें और पूर्ण सात्विक भाव से पूजन स्थल पर बैठें।

नियम: श्वेत वस्त्र, मन की निर्मलता व सत्य संकल्प

पावन श्वेत ध्वज (जैतखाम) की वंदना (White Flag Reverence)

पूजा स्थल या घर के प्रांगण में स्थापित पावन जैतखाम पर श्वेत पालो ध्वजा की वंदना करें। यह ध्वज असत्य पर सत्य की विजय और बाबा जी के सात सिद्धांतों का स्मरण कराता है।

नियम: श्वेत ध्वज को नमन व सप्त सिद्धांतों का स्मरण

सात्विक दीप प्रज्वलन व नारियल अर्पण (Lighting Sacred Lamp)

शुद्ध गाय के घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती लगाएं। शुद्ध निर्मल जल एवं नारियल (पावन फल) का अर्पण करें। दीप की ज्योति अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।

विशेष निषेध: किसी भी प्रकार की जीव-बलि व नशा पूर्णतः वर्जित है

चौका आरती एवं अमृतवाणी पाठ (Chauka Aarti & Sacred Recitation)

श्वेत आसन बिछाकर चौका आरती की थाली सजाएं। परिवार व समाज के सभी सदस्य मिलकर एक स्वर में पूज्य बाबा जी की दैनिक आरती एवं गुरु घासीदास अमृत ग्रन्थ की साखियों व वाणियों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

नियम: सामूहिक आरती गायन एवं अमृत ग्रन्थ साखी पाठ

सात्विक प्रसाद (भोग) व समता संकल्प (Prasad & Equality Pledge)

गुड़, चना, मौसमी फल या शुद्ध सात्विक मिष्ठान का भोग लगाएं। आरती उपरांत उपस्थित सभी नर-नारियों व बच्चों में बिना किसी जाति, वर्ण या ऊंच-नीच के भेद के समान रूप से प्रसाद वितरण करें और मनखे-मनखे एक समान के सिद्धांत पर चलने का संकल्प लें।

नियम: समतापूर्वक प्रसाद वितरण व मनखे-मनखे एक समान का आचरण