गिरौदपुरी धाम का सुप्रसिद्ध वार्षिक मेला प्रतिवर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पंचमी, षष्ठी एवं सप्तमी (अंग्रेजी कैलेंडर अनुसार फरवरी अथवा मार्च माह में) आयोजित होता है। यह तीन दिवसीय आयोजन मध्य भारत का सबसे विशाल धार्मिक महाकुंभ माना जाता है।

📅 मेले के 3 दिनों का विस्तृत कार्यक्रम

  • प्रथम दिन (फाल्गुन शुक्ल पंचमी): मेले का भव्य उद्घाटन, अखंड ज्योति प्रज्वलन, मंगल आरती और देश-विदेश से आने वाली पदयात्रा मंडलियों का स्वागत।
  • द्वितीय दिन (फाल्गुन शुक्ल षष्ठी - मुख्य दिवस): प्रातःकाल में ऐतिहासिक श्वेत पालो (ध्वज) का विधि-विधान से आरोहण। लाखों श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक गुरु वंदना एवं पंथी नृत्य प्रतियोगिता।
  • तृतीय दिन (फाल्गुन शुक्ल सप्तमी): विशाल संत समागम, विचार गोष्ठी, लंगर महाप्रसाद और मेले का औपचारिक समापन।

🎪 मेले में क्या-क्या आकर्षण होते हैं?

  1. हैरतअंगेज पंथी नृत्य: सफेद धोती-कुर्ता पहने युवक मांदर की गूंज पर 5-6 मंजिला मानव पिरामिड बनाकर बाबा जी के भजनों का गायन करते हैं।
  2. मीलों लंबा मेला बाजार: पारंपरिक काष्ठ खिलौने, सतनाम साहित्य, घरेलू बर्तन, झूले, खान-पान और लोक कला स्टॉल।