मुख्य मंदिर गर्भगृह की दिव्यता
गिरौदपुरी धाम का मुख्य मंदिर गर्भगृह सतनाम पंथ का सबसे पवित्र केंद्र है। यहाँ पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की पावन स्मृति में स्थापित गुरु गद्दी के दर्शन होते हैं। श्वेत संगमरमर, सुगंधित पुष्पों की मालाओं और श्वेत पालो (ध्वजों) से सजा यह गर्भगृह भक्ति और आस्था का सागर है।
गुरु गद्दी का आध्यात्मिक संदेश
सतनाम पंथ में किसी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती, बल्कि निराकार सत्य पुरुष और गुरु के पावन उपदेशों की वंदना होती है। गुरु गद्दी इसी सत्य ज्ञान, विवेक और समता का सर्वोच्च आसन है।
“सत्य पुरुष की पैंदेग से नाम, पुष्ठ परमेश्वर की — जय सतनाम।”
दैनिक अनुष्ठान एवं आरती
- प्रातः मंगला आरती: प्रतिदिन भोर में 05:30 बजे अखंड ज्योति के समक्ष मंगल आरती होती है।
- भोग एवं प्रसाद वितरण: दोपहर 12:00 बजे सात्विक भोग अर्पण के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है।
- संध्या आरती: सायं 07:00 बजे दीप प्रज्वलन व सामूहिक सतनाम भजन कीर्तन के साथ संध्या आरती संपन्न होती है।
श्रद्धालुओं के लिए दर्शन नियम
गर्भगृह में प्रवेश से पूर्व हाथ-पैर धोना और शुद्ध श्वेत या सात्विक वस्त्र धारण करना उत्तम माना जाता है। गर्भगृह के समक्ष मौन रहकर ध्यान करना आत्मिक शांति प्रदान करता है।