दैनिक महा आरती, चौका आरती विधान, पावन श्वेत ध्वजारोहण नियम एवं पूजा ग्रन्थ का संपूर्ण संकलन।
पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी ने बाह्य आडंबरों, मूर्तिपूजा, पशु-बलि, छुआछूत और नशाखोरी का पूर्णतः खंडन कर निराकार सत्य, आत्मिक शुद्धि, अहिंसा और समता पर आधारित सरल एवं सात्विक पूजा पद्धति की स्थापना की।
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करें। श्वेत रंग सत्य, शांति और पवित्रता का प्रतीक है। मन में किसी भी प्रकार का द्वेष, अहंकार या कटुता न रखें और पूर्ण सात्विक भाव से पूजन स्थल पर बैठें।
नियम: श्वेत वस्त्र, मन की निर्मलता व सत्य संकल्पपूजा स्थल या घर के प्रांगण में स्थापित पावन जैतखाम पर श्वेत पालो ध्वजा की वंदना करें। यह ध्वज असत्य पर सत्य की विजय और बाबा जी के सात सिद्धांतों का स्मरण कराता है।
नियम: श्वेत ध्वज को नमन व सप्त सिद्धांतों का स्मरणशुद्ध गाय के घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती लगाएं। शुद्ध निर्मल जल एवं नारियल (पावन फल) का अर्पण करें। दीप की ज्योति अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाती है।
विशेष निषेध: किसी भी प्रकार की जीव-बलि व नशा पूर्णतः वर्जित हैश्वेत आसन बिछाकर चौका आरती की थाली सजाएं। परिवार व समाज के सभी सदस्य मिलकर एक स्वर में पूज्य बाबा जी की दैनिक आरती एवं गुरु घासीदास अमृत ग्रन्थ की साखियों व वाणियों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
नियम: सामूहिक आरती गायन एवं अमृत ग्रन्थ साखी पाठगुड़, चना, मौसमी फल या शुद्ध सात्विक मिष्ठान का भोग लगाएं। आरती उपरांत उपस्थित सभी नर-नारियों व बच्चों में बिना किसी जाति, वर्ण या ऊंच-नीच के भेद के समान रूप से प्रसाद वितरण करें और मनखे-मनखे एक समान के सिद्धांत पर चलने का संकल्प लें।
नियम: समतापूर्वक प्रसाद वितरण व मनखे-मनखे एक समान का आचरण