छाता पहाड़ की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक महिमा
गिरौदपुरी धाम से कुछ दूरी पर स्थित छाता पहाड़ सतनाम पंथ के सर्वाधिक श्रद्धास्पद तीर्थों में से एक है। दूर से देखने पर यह पर्वत छत्र के आकार का प्रतीत होता है, इसलिए इसे छाता पहाड़ कहा जाता है।
तपस्या का पवित्र इतिहास
गृहस्थ जीवन के दायित्वों से परे होकर जब पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी ने मानव कल्याण का संकल्प लिया, तब वे इसी छाता पहाड़ की कंदराओं और घने वनों में ध्यानमग्न हुए। यहाँ उन्होंने भूख-प्यास और ऋतुओं के ताप की परवाह किए बिना अनवरत साधना की।
“सत्य की खोज में जो पर्वत पर चढ़ा, उसने समूचे संसार को समता का पाठ पढ़ा दिया।”
पहाड़ की सीढ़ियाँ व तीर्थ यात्रा
- श्वेत पाषाण सीढ़ियाँ: तलहटी से पर्वत शिखर तक पहुँचने के लिए चौड़ी, सुरक्षित और साफ-सुथरी सीढ़ियों का निर्माण किया गया है।
- विश्राम स्थल व छाया: मार्ग में श्रद्धालुओं के बैठने, विश्राम करने और पेयजल की उत्तम व्यवस्था है।
- प्रकृति का विहंगम दृश्य: शिखर पर पहुँचते ही चारों ओर हरियाली, खेतों और नदियों का मनमोहक दृश्य मन को प्रफुल्लित कर देता है।
यात्रियों के लिए सुझाव
सुबह के समय या दोपहर बाद सीढ़ियाँ चढ़ना अधिक सुखद रहता है। आरामदायक जूते-चप्पल पहनें, जल की बोतल साथ रखें और पर्वत की पवित्रता बनाए रखने हेतु स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।