मंदिर खुला है दर्शन समय: प्रातः 06:00 से रात्रि 10:00 तक
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
प्रथम पीढ़ी (चतुर्थ सुपुत्र)

गुरु अड़गडि़हादास जी

सादगी, सेवा, समर्पण एवं बंधुत्व के संवाहक

प्रथम पीढ़ी (चतुर्थ सुपुत्र)

गुरु अड़गडि़हादास जी

सादगी, सेवा, समर्पण एवं बंधुत्व के संवाहक
कालखंड 19वीं शताब्दी
अवतरण / स्थान गिरौदपुरी धाम
संबद्ध तीर्थ धाम गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी
बाबा जी के चतुर्थ सुपुत्र जो अपनी निश्छल सेवा भावना, विनम्रता और समाज में बंधुत्व व प्रेम की स्थापना हेतु समर्पित रहे।

पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान

सतनाम समाज में आपसी एकता, निस्वार्थ सेवा और गुरु परिवार की सादगीपूर्ण परंपरा के संवाहक।

जीवन परिचय एवं सादगी के प्रतिमान

बाबा गुरु घासीदास जी एवं सफूरा माता के चतुर्थ सुपुत्र गुरु अड़गडि़हादास जी अपनी असाधारण सादगी, विनम्रता और सेवा भावना के लिए जाने जाते थे। उन्होंने सदैव संत समाज के बीच रहकर दीन-दुखियों की सेवा की और बाबा जी के उपदेशों को अत्यंत सरल लोकभाषा में जन-जन तक पहुँचाया।

“अहंकार का त्याग और निस्वार्थ सेवा ही सच्चा सतनाम मार्ग है।”