मंदिर खुला है दर्शन समय: प्रातः 06:00 से रात्रि 10:00 तक
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
तृतीय पीढ़ी (मातृशक्ति)

ममतामयी मिनीमाता जी

भारत की प्रथम महिला सांसद (छ.ग.), अस्पृश्यता निवारण अधिनियम (1955) प्रणेता एवं समाज सुधारिका

तृतीय पीढ़ी (मातृशक्ति)

ममतामयी मिनीमाता जी

भारत की प्रथम महिला सांसद (छ.ग.), अस्पृश्यता निवारण अधिनियम (1955) प्रणेता एवं समाज सुधारिका
कालखंड 1913 – 1972 ई.
अवतरण / स्थान 13 मार्च 1913, दौलगांव (असम)
संबद्ध तीर्थ धाम गिरौदपुरी धाम, रायपुर, भण्डारपुरी, संसद भवन नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद (लगातार 5 बार निर्वाचित) जिन्होंने संसद में अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 पारित कराया तथा हसदेव बांगो परियोजना व महिला उत्थान हेतु जीवन समर्पित किया।

पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान

1913 में असम में जन्म, 1932 में गुरु अगमदास जी से विवाह, 1952 से 1972 तक लगातार 5 बार सांसद, संसद में अस्पृश्यता निवारण अधिनियम (1955) पारित कराना, मिनीमाता हसदेव बांगो बांध परियोजना, भिलाई इस्पात संयंत्र में स्थानीय रोजगार, महिला शिक्षा व अनाथालय, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मिनीमाता सम्मान की स्थापना।

अवतरण एवं बाल्यकाल

ममतामयी मिनीमाता जी का जन्म असम प्रांत के दौलगांव में 13 मार्च 1913 को हुआ था (बचपन का नाम मीनाक्षी देवी)। वे बाल्यकाल से ही कुशाग्र बुद्धि, दयालु स्वभाव और सत्य, अहिंसा व प्रेम की साक्षात् प्रतिमूर्ति थीं। सन् 1932 में उनका पावन विवाह गुरुगोसाईं अगमदास जी के साथ संपन्न हुआ।

उन्होंने गुरुगोसाईं अगमदास जी व राजराजेश्वरी करुणामाता जी की पावन गोद से उत्पन्न सत्यांश जगतगुरु विजय कुमार जी का वात्सल्यपूर्ण लालन-पालन कर उन्हें सतनाम संस्कारों से परिपोषित किया।

स्वतंत्र भारत की प्रथम महिला सांसद (संसदीय कीर्तिमान)

ममतामयी मिनीमाता जी सतनाम धर्म के इतिहास में स्वतंत्र भारत (छत्तीसगढ़) की प्रथम महिला सांसद थीं। गुरुगोसाईं अगमदास जी की प्रेरणा से उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन, समाज सुधार और शोषितों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में बढ़-चढ़कर भाग लिया।

सन् 1952 से 1972 तक वे लगातार 5 बार संसद सदस्य (लोकसभा सांसद) निर्वाचित हुईं (बिलासपुर, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर)। उन्होंने देश के शीर्षस्थ राष्ट्रनायकों—प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, पं. जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी व पं. रविशंकर शुक्ल के साथ घनिष्ठ संबंध रखकर छत्तीसगढ़ के विकास को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।

अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम, 1955

संसद में अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 (Untouchability Offences Act) को पारित कराने में मिनीमाता जी का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय है। उन्होंने बाल-विवाह, दहेज प्रथा, छुआछूत के विरुद्ध कानून बनवाए तथा अनाथालयों, विधवा आश्रमों और कन्या छात्रावासों की स्थापना कराई।

मिनीमाता हसदेव बांगो बांध परियोजना व रोजगार क्रांति

ममतामयी मिनीमाता जी के प्रयासों और दूरदृष्टि से मिनीमाता हसदेव बांगो बांध परियोजना का निर्माण हुआ, जिससे किसानों की लाखों एकड़ भूमि सिंचित हुई। उन्होंने भिलाई इस्पात संयंत्र (Bhilai Steel Plant) में स्थानीय निवासियों को रोजगार व औद्योगिक प्रशिक्षण दिलाने में ऐतिहासिक पहल की।

11 अगस्त 1972: असामयिक सतलोक गमन

11 अगस्त 1972 को आधी रात के समय दिल्ली पहुंचने से पूर्व एक विमान दुर्घटना में ममतामयी मिनीमाता जी का असामयिक सतलोक गमन हो गया। इस हृदयविदारक घटना से समूचे देश और छत्तीसगढ़ में गहरा शोक छा गया।

छत्तीसगढ़ शासन का 'मिनीमाता सम्मान'

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ममतामयी मिनीमाता जी की पावन स्मृति में प्रतिवर्ष समाजोत्थान और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को राज्य का प्रतिष्ठित 'मिनीमाता सम्मान' प्रदान किया जाता है।

“जब तक समाज में एक भी व्यक्ति अशिक्षित या शोषित है, तब तक स्वतंत्रता अधूरी है। नारी शिक्षा ही सामाजिक क्रांति की जननी है।”