Temple Open Darshan: 06:00 AM – 10:00 PM
Balodabazar, CG
द्वितीय पीढ़ी

धर्मवीर गुरु अगरमनदास जी

सतनामी सेना के विस्तारक, सामाजिक-आर्थिक उत्थानकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी

द्वितीय पीढ़ी

धर्मवीर गुरु अगरमनदास जी

सतनामी सेना के विस्तारक, सामाजिक-आर्थिक उत्थानकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी
कालखंड 1875 – 1923 ई.
अवतरण / स्थान 1875 ई., रतनपुर / भण्डारपुरी
संबद्ध तीर्थ धाम भण्डारपुरी धाम, तेलासीपुरीधाम, नागपुर झंडा सत्याग्रह
सतनाम समाज को सामाजिक, आर्थिक, जातीय व अंधविश्वास के दुखों से मुक्त कराने वाले, गौहत्या विरोधी आंदोलन व 1923 नागपुर झंडा सत्याग्रह के महानायक।

पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान

1894 में कनुकामाता से विवाह, समाज के 4 दुखों का निवारण, सतनामी सेना विस्तार, अंग्रेजी शासन द्वारा कसाईखाना खोलने के विरोध में जनआंदोलन व विजय, जून 1923 नागपुर झंडा सत्याग्रह में भागीदारी।

अवतरण एवं जीवन परिचय

गुरु आगरदास जी एवं मुटकीमाता के सुपुत्र गुरु अगरमनदास जी का जन्म 1875 ई. में हुआ। सन् 1894 में 20 वर्ष की आयु में उनका विवाह कनुकामाता जी के साथ हुआ, जिनसे प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी गुरुगोसाईं अगमदास जी का जन्म हुआ।

समाज के 4 प्रमुख दुखों का निवारण

गुरु अगरमनदास जी ने समाज के 4 मूलभूत दुखों के निवारण हेतु अभियान चलाया: सामाजिक पिछड़ापन, आर्थिक विपन्नता, जातिगत भेदभाव एवं अंधविश्वास।

गौहत्या विरोधी जनआंदोलन एवं कोर्ट में ऐतिहासिक विजय

अंग्रेजी शासन द्वारा खोले जा रहे कसाईखानों के विरुद्ध उन्होंने अपने सुपुत्र अगमदास जी और राजमहंत नयनदास सहित 108 महंतों को लेकर विशाल जनआंदोलन किया। अदालत में मुकदमा जीतकर यह ऐतिहासिक शर्तनामा लिखवाया कि सतनामी बहुल क्षेत्रों में कोई कसाईखाना नहीं होगा।

जून 1923: नागपुर झंडा सत्याग्रह एवं सतलोक गमन

भारत की स्वतंत्रता हेतु उन्होंने जून 1923 में नागपुर के ऐतिहासिक झंडा सत्याग्रह में भाग लिया। नागपुर से लौटने के कुछ समय पश्चात 1923 ई. में वे सतलोक गमन कर गए।

“सतनामी समाज शांति और प्रेम की निर्मल निर्झरिणी है; सतत सत्प्रयास से सफलता निश्चित है।”