द्वितीय पीढ़ी (आगरदास जी के द्वितीय सुपुत्र)
गुरु अजबदास जी
सतनाम धर्म संवाहक एवं तेलासी बाड़ा संचालक
कालखंड
1876 – 20वीं शताब्दी
अवतरण / स्थान
1876 ई., गिरौदपुरी / भण्डारपुरी धाम
संबद्ध तीर्थ धाम
तेलासी बाड़ा (तेलासीपुरी), भण्डारपुरी धाम, खपरी गद्दी
प्रतापी गुरु आगरदास जी के सुपुत्र व गुरु अगरमनदास जी के भ्राता, जिन्होंने तेलासी बाड़ा और सतनाम शक्ति दरबारों का संचालन किया।
पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान
तेलासीपुरी बाड़ा का कुशल प्रबंधन, खपरी व भण्डारपुरी गद्दी के विस्तार में अमूल्य योगदान।
अवतरण एवं जीवन परिचय
प्रतापी गुरु आगरदास जी एवं मुटकीमाता जी के सुपुत्र गुरु अजबदास जी का जन्म 1876 ई. में हुआ। वे धर्मवीर गुरु अगरमनदास जी के भ्राता थे।
तेलासी बाड़ा एवं गद्दी संचालन
गुरु अजबदास जी ने सपरिवार तेलासी बाड़ा (तेलासीपुरी) में निवास करते हुए सतनाम शक्ति दरबारों और सामाजिक संगठन को सुदृढ़ किया। उनके वंश से आगे गुरु अतिबल दास जी (खपरी गद्दी), गुरु जगतारन दास जी (भण्डारपुरी गद्दी) और गुरु मुक्तावन दास जी (खपरी गद्दी) जैसी पूज्य परंपराएं प्रस्फुटित हुईं।
“सत्य और समता का मार्ग ही संपूर्ण मानव जाति का कल्याण करता है।”