मंदिर खुला है दर्शन समय: प्रातः 06:00 से रात्रि 10:00 तक
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
तृतीय पीढ़ी (खपरी गद्दी)

गुरु मुक्तावन दास जी

खपरी गद्दी संचालक, सामाजिक न्याय व स्वाभिमान के प्रतीक

तृतीय पीढ़ी (खपरी गद्दी)

गुरु मुक्तावन दास जी

खपरी गद्दी संचालक, सामाजिक न्याय व स्वाभिमान के प्रतीक
कालखंड 1898 – 20वीं शताब्दी
अवतरण / स्थान 1898 ई., खपरी / भण्डारपुरी
संबद्ध तीर्थ धाम गुरुगद्दी खपरी, भण्डारपुरी धाम
खपरी गद्दी के पूज्य गुरु, जिनका ऐतिहासिक संबंध डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई से रहा।

पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान

खपरी गद्दी का संचालन, 24 अक्टूबर 1947 को भण्डारपुरी में ऐतिहासिक गुरु दर्शन सम्मेलन की अध्यक्षता, सामाजिक चेतना का प्रसार।

जीवन परिचय एवं सामाजिक आंदोलन

गुरु मुक्तावन दास जी सतनाम गुरु वंश की खपरी गद्दी के तेजस्वी संचालक थे। वे गुरुगोसाईं अगमदास जी के समकालीन व चचेरे भ्राता थे।

डॉ. भीमराव अंबेडकर से ऐतिहासिक संबंध

सामाजिक कुरीतियों व विरोधियों द्वारा लगाए गए षड्यंत्रकारी मामले में बोधिसत्व डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने स्वयं कानूनी पैरवी कर गुरु मुक्तावन दास जी को बाइज्जत दोषमुक्त कराया था। इसके उपरांत उन्होंने समाज में शिक्षा, स्वाभिमान और संवैधानिक चेतना जगाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

24 अक्टूबर 1947: भण्डारपुरी गुरु दर्शन सम्मेलन

उन्होंने 24 अक्टूबर 1947 को भण्डारपुरी में आयोजित विशाल गुरु दर्शन सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसने स्वतंत्रता के समय सतनामी समाज को एकजुट और संगठित किया।

“स्वाभिमान, एकता और शिक्षा ही शोषित समाज के उत्थान की सबसे बड़ी शक्ति है।”