मंदिर खुला है दर्शन समय: प्रातः 06:00 से रात्रि 10:00 तक
बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़
प्रथम पीढ़ी (सुपुत्री)

सुभद्रा देवी जी

मातृशक्ति, वात्सल्य, पारिवारिक संस्कार एवं सद्भाव की प्रेरणा

प्रथम पीढ़ी (सुपुत्री)

सुभद्रा देवी जी

मातृशक्ति, वात्सल्य, पारिवारिक संस्कार एवं सद्भाव की प्रेरणा
कालखंड 19वीं शताब्दी
अवतरण / स्थान गिरौदपुरी धाम
संबद्ध तीर्थ धाम गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी
बाबा गुरु घासीदास जी की प्रथम सुपुत्री जिन्होंने सतनाम परिवार में नारी सम्मान, संस्कारों और वात्सल्य की ज्योति प्रज्वलित की।

पावन जीवन गाथा एवं ऐतिहासिक योगदान

सतनाम समाज में महिलाओं की गरिमा, पारिवारिक संस्कारों और समरसता की प्रणेता।

जीवन परिचय एवं मातृशक्ति की प्रेरणा

बाबा गुरु घासीदास जी एवं सफूरा माता की सुपुत्री सुभद्रा देवी ने सतनाम आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी और गरिमा को स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। वे वात्सल्य, सेवा और संस्कारों की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं।

“नारी का सम्मान और सुदृढ़ संस्कार ही उन्नत समाज का आधार हैं।”