संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी
सतनाम पंथ के संस्थापक, मूल प्रवर्तक एवं सामाजिक समता के महासूर्यसत्य, समता और मानव मात्र की एकता के प्रणेता जिन्होंने "मनखे-मनखे एक समान" का अमर उद्घोष कर जाति-पाति, मूर्तिपूजा व बलि प्रथा का खंडन किया।
सत्य, समता और मानवता के संवाहक सतनाम पंथ की प्रथम पीढ़ी से लेकर वर्तमान षष्ठम पीढ़ी तक के धर्मगुरुओं का प्रामाणिक इतिहास व अमर योगदान।
सत्य, समता और मानव मात्र की एकता के प्रणेता जिन्होंने "मनखे-मनखे एक समान" का अमर उद्घोष कर जाति-पाति, मूर्तिपूजा व बलि प्रथा का खंडन किया।
मात्र 7 वर्ष की आयु में 12 वर्षों का अज्ञातवास व कठिन साधना कर अमृत प्राप्त करने वाले, 21 अनमोल वाणियों के प्रणेता।
अद्वितीय संगठनकर्ता, न्यायविद व शूरवीर जिन्होंने समाज को सतनाम संविधान दिया, 1820 में ब्रिटिश शासन से "राजा" की पदवी पाई और 1860 में समाज रक्षा हेतु शहादत दी।
राजागुरु बालकदास जी के बाद गद्दीनसीन होकर गिरौदपुरी धाम में 1862 में प्रथम बार जैतखाम पर श्वेत पालो और मंदिर पर कलश चढ़ाने वाले प्रतापी गुरु।
बाबा जी के चतुर्थ सुपुत्र जो अपनी निश्छल सेवा भावना, विनम्रता और समाज में बंधुत्व व प्रेम की स्थापना हेतु समर्पित रहे।
बाबा गुरु घासीदास जी की प्रथम सुपुत्री जिन्होंने सतनाम परिवार में नारी सम्मान, संस्कारों और वात्सल्य की ज्योति प्रज्वलित की।
राजागुरु बालकदास जी के तेजस्वी सुपुत्र जिन्होंने बोड़सराधाम गद्दी और 9 शक्ति केंद्रों का संचालन किया तथा तेलासीपुरी में गुरुद्वारा स्थापित कराया।
सतनाम समाज को सामाजिक, आर्थिक, जातीय व अंधविश्वास के दुखों से मुक्त कराने वाले, गौहत्या विरोधी आंदोलन व 1923 नागपुर झंडा सत्याग्रह के महानायक।
20वीं सदी के महान समाज सुधारक जिन्होंने भारत की संविधान सभा में भाग लेकर वंचितों के अधिकारों को संविधान में सुरक्षित कराया और 1935 में विश्व प्रसिद्ध गिरौदपुरी मेले की नींव रखी।
छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद (लगातार 5 बार निर्वाचित) जिन्होंने संसद में अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 पारित कराया तथा हसदेव बांगो परियोजना व महिला उत्थान हेतु जीवन समर्पित किया।
गिरौदपुरी धाम मेला संरक्षिका, सामूहिक आदर्श विवाह परंपरा की जनक एवं जगतगुरु विजय कुमार जी की पूज्य माता, जिन्होंने 1953 से 2006 तक सतनाम संगठन और तीर्थों का सफल संचालन किया।
सतनामी समाज के सर्वोच्च धर्मगुरु एवं गिरौदपुरी मेला समिति के अध्यक्ष, जिनके नेतृत्व में गगनचुंबी जैतखाम व धाम का अभूतपूर्व विकास हुआ।
आधुनिक युग में सतनाम दर्शन, गुरु वंशावली के प्रामाणिक शोध, गिरौदपुरी धाम के वैश्विक सौंदर्यीकरण और सामाजिक समरसता के अग्रदूत।
सतनाम परंपरा की नई पीढ़ी के रूप में युवा वर्ग को सत्य, समता, शिक्षा और बाबा जी के पावन सिद्धांतों से जोड़ने हेतु अग्रसर।
गिरौदपुरी ग्राम में बाल्यकाल, छाता पहाड़ पर कठिन तपस्या, सतनाम पंथ की स्थापना व ९ ऐतिहासिक पड़ाव।