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Balodabazar, CG
पावन सतनाम परंपरा

परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास जी की पावन गुरु वंशावली

सत्य, समता और मानवता के संवाहक सतनाम पंथ की प्रथम पीढ़ी से लेकर वर्तमान षष्ठम पीढ़ी तक के धर्मगुरुओं का प्रामाणिक इतिहास व अमर योगदान।

सतनाम वंशावली रूपरेखा

गुरु गद्दी एवं वंशज परंपरा (Lineage Hierarchy)

मूल संस्थापक व प्रवर्तक

संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

(1756 – 1850 ई.) ⚭ माता सफूरा दाई
ज्येष्ठ सुपुत्र तपस्वी गुरु अमरदास जी चटुवापुरी समाधि धाम
द्वितीय सुपुत्र राजागुरु बालकदास जी 1857 क्रांति • सतनाम संविधान
तृतीय सुपुत्र गुरु आगरदास जी सतनाम धर्म प्रचारक
चतुर्थ सुपुत्र गुरु अड़गडि़हादास जी सादगी व सत्य संवाहक
प्रथम सुपुत्री सुभद्रा देवी जी मातृशक्ति व संस्कार
आगे की पीढ़ियां: गुरु साहेबदास जी ➔ गुरु अगरमनदास जी ➔ गुरुगोसाईं अगमदास जी ⚭ ममतामयी मिनीमाता जीजगतगुरु विजय कुमार जीजगतगुरु रूद्र कुमार जीबालगुरु रिपुदमन जी
मूल संस्थापक व प्रवर्तक

संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी

सतनाम पंथ के संस्थापक, मूल प्रवर्तक एवं सामाजिक समता के महासूर्य
कालखंड / जन्म 1756 – 1850 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, छाता पहाड़, अमर गुफा, तेलासीपुरी, भण्डारपुरी

सत्य, समता और मानव मात्र की एकता के प्रणेता जिन्होंने "मनखे-मनखे एक समान" का अमर उद्घोष कर जाति-पाति, मूर्तिपूजा व बलि प्रथा का खंडन किया।

“सत्य ही ईश्वर है और सत्य ही मानव का सबसे पावन आभूषण है। समस्त मानव एक समान हैं।”
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प्रथम पीढ़ी (ज्येष्ठ सुपुत्र)

तपस्वी गुरु अमरदास जी

आध्यात्मिक चिंतक, तपस्वी गुरु एवं धर्मनीति के मुख्य संवाहक
कालखंड / जन्म 1794 – 1824 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल चटुवापुरी धाम (शिवनाथ तट), अमर गुफा, तेलासीपुरी, भण्डारपुरी

मात्र 7 वर्ष की आयु में 12 वर्षों का अज्ञातवास व कठिन साधना कर अमृत प्राप्त करने वाले, 21 अनमोल वाणियों के प्रणेता।

“सत्य और अहिंसा ही मानव का श्रेष्ठतम धर्म है। सतत अभ्यास, संयम और निस्वार्थ सेवा से जीवन सफल होता है।”
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प्रथम पीढ़ी (द्वितीय सुपुत्र)

बलिदानी राजागुरु बालकदास जी

सतनाम संविधान निर्माता, 1820 ब्रिटिश राजा पदवी, 1857 क्रांति के महानायक व अमर शहीद
कालखंड / जन्म 1801 – 1860 ई. (शहादत: 28 मार्च 1860)
संबद्ध तीर्थ स्थल भण्डारपुरी धाम, तेलासी बाड़ा, औराबांधा (मुंगेली), बोड़सरा

अद्वितीय संगठनकर्ता, न्यायविद व शूरवीर जिन्होंने समाज को सतनाम संविधान दिया, 1820 में ब्रिटिश शासन से "राजा" की पदवी पाई और 1860 में समाज रक्षा हेतु शहादत दी।

“सतनाम धर्म की ध्वजा और स्वाभिमान को कभी झुकने नहीं देंगे। सत्य और समाज की रक्षा हेतु प्राणों का बलिदान भी सहर्ष स्वीकार है।”
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प्रथम पीढ़ी (तृतीय सुपुत्र)

प्रतापी गुरु आगरदास जी

सतनाम धर्मध्वज वाहक, शक्ति दरबारों के निर्माता एवं प्रथम कलश-पालो रोपणकर्ता
कालखंड / जन्म 1803 – 1875 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, बोड़सराधाम, भण्डारपुरी, तेलासीपुरी

राजागुरु बालकदास जी के बाद गद्दीनसीन होकर गिरौदपुरी धाम में 1862 में प्रथम बार जैतखाम पर श्वेत पालो और मंदिर पर कलश चढ़ाने वाले प्रतापी गुरु।

“मानव जीवन का वास्तविक सार सतनाम है। समता, शिक्षा और नशामुक्त जीवन ही सतनाम धर्म का मूल आधार है।”
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प्रथम पीढ़ी (चतुर्थ सुपुत्र)

गुरु अड़गडि़हादास जी

सादगी, सेवा, समर्पण एवं बंधुत्व के संवाहक
कालखंड / जन्म 19वीं शताब्दी
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी

बाबा जी के चतुर्थ सुपुत्र जो अपनी निश्छल सेवा भावना, विनम्रता और समाज में बंधुत्व व प्रेम की स्थापना हेतु समर्पित रहे।

“अहंकार का त्याग और निस्वार्थ सेवा ही सच्चा सतनाम मार्ग है।”
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प्रथम पीढ़ी (सुपुत्री)

सुभद्रा देवी जी

मातृशक्ति, वात्सल्य, पारिवारिक संस्कार एवं सद्भाव की प्रेरणा
कालखंड / जन्म 19वीं शताब्दी
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी

बाबा गुरु घासीदास जी की प्रथम सुपुत्री जिन्होंने सतनाम परिवार में नारी सम्मान, संस्कारों और वात्सल्य की ज्योति प्रज्वलित की।

“नारी का सम्मान और सुदृढ़ संस्कार ही उन्नत समाज का आधार हैं।”
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द्वितीय पीढ़ी

युवराज गुरु साहेबदास जी

बोड़सराधाम गद्दी के संचालक, तेलासीपुरी गुरुद्वारा निर्माता व बाल चेतना के प्रतीक
कालखंड / जन्म 1844 – 1868 ई. (24 वर्ष की अल्पायु)
संबद्ध तीर्थ स्थल बोड़सराधाम गद्दी, तेलासीपुरीधाम, भण्डारपुरी

राजागुरु बालकदास जी के तेजस्वी सुपुत्र जिन्होंने बोड़सराधाम गद्दी और 9 शक्ति केंद्रों का संचालन किया तथा तेलासीपुरी में गुरुद्वारा स्थापित कराया।

“धैर्य, क्षमा, करुणा, दया, मृदुवाणी, अद्वेष और शुचिता—ये सात साधन ही मनुष्य को सच्चा सुख प्रदान करते हैं।”
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द्वितीय पीढ़ी

धर्मवीर गुरु अगरमनदास जी

सतनामी सेना के विस्तारक, सामाजिक-आर्थिक उत्थानकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी
कालखंड / जन्म 1875 – 1923 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल भण्डारपुरी धाम, तेलासीपुरीधाम, नागपुर झंडा सत्याग्रह

सतनाम समाज को सामाजिक, आर्थिक, जातीय व अंधविश्वास के दुखों से मुक्त कराने वाले, गौहत्या विरोधी आंदोलन व 1923 नागपुर झंडा सत्याग्रह के महानायक।

“सतनामी समाज शांति और प्रेम की निर्मल निर्झरिणी है; सतत सत्प्रयास से सफलता निश्चित है।”
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तृतीय पीढ़ी

गुरुगोसाईं अगमदास जी

भारत की संविधान सभा सदस्य, महान स्वतंत्रता सेनानी, सांसद एवं 1935 गिरौदपुरी मेला संस्थापक
कालखंड / जन्म 1895 – 1954 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम (मेला संस्थापक 1935), तेलासीपुरी, भण्डारपुरी, खडुवापुरी

20वीं सदी के महान समाज सुधारक जिन्होंने भारत की संविधान सभा में भाग लेकर वंचितों के अधिकारों को संविधान में सुरक्षित कराया और 1935 में विश्व प्रसिद्ध गिरौदपुरी मेले की नींव रखी।

“कण्ठी, श्वेत ध्वज और सत्य आचरण ही सतनामी की पहचान है। शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से ही समाज का संपूर्ण उत्थान संभव है।”
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तृतीय पीढ़ी (मातृशक्ति)

ममतामयी मिनीमाता जी

भारत की प्रथम महिला सांसद (छ.ग.), अस्पृश्यता निवारण अधिनियम (1955) प्रणेता एवं समाज सुधारिका
कालखंड / जन्म 1913 – 1972 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, रायपुर, भण्डारपुरी, संसद भवन नई दिल्ली

छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद (लगातार 5 बार निर्वाचित) जिन्होंने संसद में अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 पारित कराया तथा हसदेव बांगो परियोजना व महिला उत्थान हेतु जीवन समर्पित किया।

“जब तक समाज में एक भी व्यक्ति अशिक्षित या शोषित है, तब तक स्वतंत्रता अधूरी है। नारी शिक्षा ही सामाजिक क्रांति की जननी है।”
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तृतीय पीढ़ी (मातृशक्ति)

राजराजेश्वरी करुणामाता जी

गिरौदपुरी धाम मेला संरक्षिका, गुरुमाता एवं वात्सल्य की प्रतिमूर्ति
कालखंड / जन्म 1918 – 2006 ई.
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी धाम

गिरौदपुरी धाम मेला संरक्षिका, सामूहिक आदर्श विवाह परंपरा की जनक एवं जगतगुरु विजय कुमार जी की पूज्य माता, जिन्होंने 1953 से 2006 तक सतनाम संगठन और तीर्थों का सफल संचालन किया।

“श्रद्धा, सेवा और सद्भाव से ही तीर्थ का गौरव अक्षुण्ण रहता है।”
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चतुर्थ पीढ़ी

जगतगुरु विजय कुमार जी

गिरौदपुरी धाम मेला समिति अध्यक्ष, सतनाम धर्मगुरु एवं गद्दीनशीन
कालखंड / जन्म 20वीं–21वीं शताब्दी
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी धाम, अगमधाम खडुवापुरी

सतनामी समाज के सर्वोच्च धर्मगुरु एवं गिरौदपुरी मेला समिति के अध्यक्ष, जिनके नेतृत्व में गगनचुंबी जैतखाम व धाम का अभूतपूर्व विकास हुआ।

“बाबा गुरु घासीदास जी की तपोभूमि गिरौदपुरी धाम संपूर्ण मानवता के लिए सत्य और शांति का वैश्विक केंद्र है।”
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पंचम पीढ़ी (वर्तमान)

जगतगुरु रूद्र कुमार जी

सतनाम पंथ के मार्गदर्शक, पूर्व मंत्री (छ.ग. शासन) एवं इतिहास-शोध संवाहक
कालखंड / जन्म वर्तमान
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी, तेलासीपुरी, छाता पहाड़

आधुनिक युग में सतनाम दर्शन, गुरु वंशावली के प्रामाणिक शोध, गिरौदपुरी धाम के वैश्विक सौंदर्यीकरण और सामाजिक समरसता के अग्रदूत।

“बाबा जी के सिद्धांत आज के युग में और भी अधिक प्रासंगिक हैं। शिक्षा, संस्कार और सत्य आचरण से ही समाज निरंतर प्रगति कर सकता है।”
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षष्ठम पीढ़ी (नवीन पीढ़ी)

बालगुरु रिपुदमन जी

षष्ठम पीढ़ी के युवा ध्वजवाहक एवं सतनाम संस्कारों के संवाहक
कालखंड / जन्म वर्तमान (नवीन पीढ़ी)
संबद्ध तीर्थ स्थल गिरौदपुरी धाम, भण्डारपुरी धाम

सतनाम परंपरा की नई पीढ़ी के रूप में युवा वर्ग को सत्य, समता, शिक्षा और बाबा जी के पावन सिद्धांतों से जोड़ने हेतु अग्रसर।

“युवा शक्ति ही समाज का भविष्य है; सतनाम के पावन संस्कारों से जुड़कर ही युवा राष्ट्र का गौरव बढ़ा सकते हैं।”
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गिरौदपुरी ग्राम में बाल्यकाल, छाता पहाड़ पर कठिन तपस्या, सतनाम पंथ की स्थापना व ९ ऐतिहासिक पड़ाव।

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